उम्मीदों और फर्ज के बीच झूलते परिवार की गाथा, कॉमेडी, ड्रॉमेडी और ट्रैजेडी का उम्दा चित्रण
रेटिंग 4/5 स्टारकास्ट सुप्रिया पाठक, मनोज पाहवा, विक्रांत मैसी, कोंकणा सेन शर्मा, विनीत कुमार, सादिया सिद्दीकी, बृजेंद्र काला, महेश शर्मा, राजेंद्र गुप्ता, दिव्या जगदाले निर्देशक सीमा पाहवा निर्माता जियो स्टूडियो, दृश्यम फिल्म्स म्यूजिक सागर देसाई जोनर सोशल ड्रामा अवधि 112 मिनट बतौर निर्देशक सीमा पाहवा ने अपनी फिल्म 'रामप्रसाद की तेरहवीं' में ज्यादातर परिवारों में दिखने वाले दिखावटी स्नेह, थोपे हुए कर्तव्यों, पूर्वाग्रहों, उम्मीदों और फर्ज का आइना दिखाया है। रामप्रसाद भार्गव की मृत्यु के बाद उसके छह बेटों समेत कुल 20 लोगों का परिवार घर में जुटता है। बेटों के अपने संघर्ष हैं। बेटियों को भी जीवन से उन्हें वह नहीं मिला, जो वह चाहती थीं। रामप्रसाद भार्गव भी अपने लंबे चौड़े परिवार से अपने मन की बात खुल कर जाहिर नहीं कर सके। नतीजतन उनकी औलादों को उनसे जीवनभर शिकायतें रहीं। असल में ऐसे हालात यहां उनके आपसी कम्युनिकेशन गैप के चलते उत्पन्न होते हैं। यह शायद हर आम भारतीय परिवारों की हकीकत है। परिवार का मुखिया न जाने क्यों अपने बच्चों से खुलकर प्यार ...