'इस संसार में एक सुप्रसिद्ध और लक्ष्मीपुत्र की संतान होने से अच्छा सौभाग्य क्या हो सकता है'

मेरे पिताजी असाधारण व्यवसायी थे। उन्होंने अपनी प्रतिभा, दूरदर्शिता और ईश्वर प्रदत्त शक्ति के बल पर अपने सामान्य से व्यवसाय एवं परिवार की संपत्ति को एक साम्राज्य में बदल दिया। उनकी छोटी-सी आशा थी कि उनकी दोनों संतानें कार्यक्षमता के हिमालय के शीर्ष पर पहुंचें। दादाजी, पिताजी और पुत्र तीन पीढ़ियों ने प्रेसिडेंसी कॉलेज से पढ़ाई की थी, लेकिन उन्होंने अपने पुत्रों को पार्क स्ट्रीट स्थित सेंट जेवियर्स कॉलेज भेजने में जरा भी संकोच नहीं किया। वे एक बार किसी को ज़ुबान दे देते थे तो चाहे जितना व्यावसायिक नुकसान हो जाए, वो अपनी ज़ुबान से फिरते नहीं थे। कहा करते थे- इस मानसिकता से मेरा कोई नुकसान नहीं हुआ है। मैंने सिर्फ ज़ुबान पर संपत्तियों को या कंपनियों को खरीदा है, यहां तक कि अनुभवी पिताजी के अनुरोध पर बड़ी कंपनी छोड़ भी दी है।

आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें

from दैनिक भास्कर https://ift.tt/2lhrpPc

Comments

Popular posts from this blog

ऐश्वर्या राय के इस गाने पर नुसरत फतह अली खान के फैन हुए नाराज......