
मैं जब बड़ा होने लगा तो उन्हीं की तरह का एक्टर बनना चाहता था। एक्टिंग के प्रति उनमें कमाल का जुनून और उत्साह है। हम दोनों में टिपिकल पुराने जमाने के बाप-बेटे वाला संबंध है। मैं तो उनसे आज भी नजरें मिलाकर बातें नहीं कर पाता। वे मेरे साथ उसी तरह का रिश्ता रखना चाहते थे, जैसा मेरे दादाजी यानी उनके पिताजी के साथ उनका था। बचपन में उनके साथ डिनर टेबल तक पर मैं डरता था। तब मुझे सब्जी बहुत अच्छी नहीं लगती थी। चिकन खाया करता था। उस पर अगर वे मुझे नॉर्मल आवाज में भी सब्जी खाने को कहते तो मेरी रुलाई फूट पड़ती थी।
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