
मैं सीए का कोर्स नहीं करना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा सका कि पिता को ना कह दूं। वे जो कहते थे, मैं करता था। मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे ऐसे माता-पिता मिले। असल में मेरे लिए तो हर दिन ही फादर्स डे है। वे सबसे बेहतर, सबसे प्यारे और सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाले पिता थे। मैंने हमेशा उन्हें श्रद्धा, सम्मान और प्रेम से देखा। वे मुझसे जुड़ी छोटी से छोटी बातों में पूरी दिलचस्पी लेते थे। वो चाहे मेरी पढ़ाई हो या खेलकूद का मामला या फिर मेरे शौक। पिता अपने व्यवसाय से जुड़े कामों में काफी व्यस्त रहा करते थे, इसके बावजूद उन्होंने हमेशा मेरे लिए समय निकाला।
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