13 दिन से क्वारैंटाइन में दिव्यांका त्रिपाठी का पायलट भाई, एक्ट्रेस ने बोली- वह संक्रमित नहीं

टीवी डेस्क. अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी के भोपाल स्थित घर के बाहर 'COVID-19 डू नॉट विजिट' का नोटिस लगा हुआ है। दरअसल, उनके भाई ऐश्वर्य त्रिपाठी इंडिगो फ्लाइट में पायलट हैं और कई इंटरनेशनल फ्लाइट्स उड़ाने के बाद कुछ दिनों पहले ही भोपाल लौटे हैं। ऐसे में उन्हें होम क्वारैंटाइन में रहने के लिए कहा गया है। हालांकि, दिव्यांका की मानें उनके भाई को एहतियात के तौर पर क्वारैंटाइन में रहने की सलाह दी गई है। वे कोरोनावायरस से संक्रमित नहीं हैं।

'मेरे भाई में कोरोना के कोई लक्षण नहीं'
दिव्यांका ने एक अंग्रेजी वेबसाइट से बातचीत में कहा, "मेरे भाई की आखिरी फ्लाइट 13 दिन पहले थी। उसमें कोरोनावायरस के कोई लक्षण नहीं हैं। इसके अलावा वह हर दिन अधिकृत सरकारी डॉक्टरों से खुद की जांच करा रहा है। हाल ही इंटरनेशनल उड़ानों पर रहे सभी एविएशन क्रू मेंबर्स ने खुद को सेल्फ क्वारैंटाइन में रखा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे सभी कोरोनावायरस से संक्रमित हैं। यह सिर्फ सुरक्षा का उपाय है।"

दिव्यांका ने सोशल मीडिया पर भी दी सफाई

दिव्यंका ने सोशल मीडिया पर भी सफाई दी है। वे लिखती हैं, "मेरा भाई पायलट है, जो स्वेच्छा से क्वारैंटाइन है और 13 दिन से उसके अंदर किसी तरह के लक्षण दिखाई नहीं दिए। अगर वह संक्रमित होता तो वह खुद भी दूसरे जिम्मेदार स्टाफ की तरह ट्रीट करता। हाल ही में अधिकारियों ने हमारे भोपाल वाले घर के बाहर लेबल लगाया है, जो कि बेहद जरूरी है। लेकिन वे यह मेंशन करना भूल गए कि मेरा भाई COVID पॉजिटिव नहीं है।"

पोस्ट में दिव्यांका का दर्द भी दिखा
दिव्यांका ने अपनी पोस्ट में दर्द बयां करते हुए आगे लिखा है, "यह लेबल लगने से पहले तक मुझे अंदाजा भी नहीं था कि एयरलाइन्स स्टाफ किस प्रताड़ना से गुजर रहा है। कई लोगों पर उनके घर छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। कईयों का इलाज हो रहा है और उनके परिवार को भला-बुरा कहा जा रहा है। सिर्फ इसलिए कि उन्होंने अपनी जान से बढ़कर आपकी सेवा को चुना।"

'भाई सरकार के अंतिम निर्देश तक फ्लाइट उड़ाता रहा'
दिव्यांका की पोस्ट के मुताबिक, "मेरे पिता अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर अपनी फार्मेसी से आपको दवा उपलब्ध करा रहे हैं। मेरा भाई कई अजनबी पैसेंजर्स को उनके घर तक पहुंचाने के लिए सरकार के अंतिम निर्देश तक फ्लाइट उड़ाता रहा। ऐसा जोखिम कई भाई, बहन, पिता, माता हमें हर दिन आवश्यक सेवाएं देने के लिए कर रहे हैं, जबकि उनके परिवार केवल उनकी भलाई के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।"

'धन्यवाद मत दो, लेकिन सम्मान से तो जीने दो'

बकौल दिव्यांका, "हम आसानी से घूम रहे हैं और दवाएं, किराना आदि खरीद रहे हैं। लेकिन जब इन निस्वार्थ कर्मचारियों के लिए कुछ कहने की बात आती है तो हम में से कुछ लोग उनके अपमान का रास्ता चुनते हैं। कम से कम हम पड़ोसी और सह-नागरिक होने के नाते सम्मान तो कर ही सकते हैं। अगर पर्सनली उन्हें धन्यवाद नहीं दे सकते तो कम से कम सम्मान के साथ जीने दीजिए। "



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दिव्यांका त्रिपाठी और उनके भाई ऐश्वर्य।


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