विंदु ने बताए पिता के हनुमान बनने के किस्से, रामायण के 11 साल पहले ही दारा सिंह बन चुके थे 'बजरंग बली'
रामायण में हनुमान का रोल निभाने वाले लीजेंड्री एक्टर दारा सिंह इस रोल को पहले भी निभा चुके थे। दारा सिंह के बेटे विंदु ने बताया कि उनके पिता को सबसे पहले हनुमान बनाने का काम 1976 में चंद्रकांत ने किया था। जिन्होंने दारा सिंह के साथ फिल्म बजरंग बली बनाई थी। यह फिल्म ब्लॉकबस्टर रही और पिता को घर घर में पवन पुत्र हनुमान के नाम से पहचाना जाने लगा।
सपने में दिखे थे मेरे पिताजी : बजरंग बली की रिलीज के 11 साल बाद रामानंद सागर ने रामायण टीवी शो बनाया। विंदु कहते हैं- पापाजी (रामानंद सागर) ने जब रामायण बनाना शुरू किया था तो दीपिका चिखलिया सीता के रोल के लिए पहली पसंद थीं। अरुण गोविल राम के लिए फर्स्ट चॉइस नहीं थे। वे किसी और रोल के लिए चुने गए थे लेकिन उन्होंने कहा कि वे केवल राम का ही रोल करना चाहते हैं। एक रात पापाजी को सपने में मेरे पिता हनुमान के रूप में दिखाई दिए। मेरे पिताजी के पास जब यह रोल आया तो उनके पास इसे करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं था, क्योंकि पापाजी को कोई मना नहीं करता था।
रामायण के बाद महाभारत में भी थे दारा सिंह :विंदु बताते हैं- उस वक्त मेरे पिता जी की उम्र 60 साल थी। और सालों रेसलिंग करने के बाद उनके घुटने और कंधे परेशानी देने लगे थे। रामानंद सागर जी ने ही उन्हें रोल के लिए मनाया। हालांकि वे हनुमानजी के रोल के लिए पूरी तरह फिट थे। रामायण ने ही दारा सिंह को हनुमान जी का चेहरा बना दिया था।रामायण के फिर से टेलीकास्ट होने पर विंदु खुश हैं। उन्होंने बताया कि रामायण ने ही सागर्स को वापस लाने का काम किया था। मेरे पिता ने इसके बाद सिर्फ एक बार और बीआर चोपड़ा की महाभारत में हनुमान का रोल निभाया था, लेकिन वह काफी छोटा था।
पिता के बाद विंदु थे पहली पसंद : जब तक दारा सिंह थे तब तक हनुमान के रोल के लिए वही पहली पसंद रहे। उनके बाद विंदु ने उनकी जगह ली। 1996 में टीवी शो जय वीर हनुमान के लिए उन्हें रोल ऑफर हुआ था। विंदु कहते हैं-मैं इस बात को लेकर हिचकिचा रहा था कि जो रोल मेरे पिता ने निभाया है उसमें मैं कैसे निभा पाऊंगा लेकिन मैंने इसे चैलेंज की तरह लिया। अब मुझे हर साल दिल्ली में रामलीला के द्वारा हनुमान का रोल निभाने बुलाया जाता है।
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