निर्देशक रमेश सिप्पी बोले- जया की आंखों में मैजिक है, एक शॉट में चंचलता और दूसरे में दिखा देती हैं सूनापन

देशभर में जारी लॉकडाउन के बीच वेटरन एक्ट्रेस जया बच्चन आज (9 अप्रैल) अपना 74वां जन्मदिन मना रही हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे जितनी संवेदनशील अभिनेत्री हैं, उतनी ही बिंदास और बेबाक शख्सियत भी हैं। इस खास मौके पर शोले और शान जैसी फिल्मों के निर्देशक रमेश सिप्पी, उनके क्लासमेट/एक्टर अनिल धवन और बच्चन परिवार के मेकअप मैन और निर्माता दीपक सावंत ने जया के कमिटमेंट, स्टारडम और जुझारूपन के कुछ किस्से भास्कर को बताए।

सुप्रसिद्ध निर्देशक रमेश सिप्पीबोले- 'जया की आंखों में मैजिक है'

'शोले के लिए जया बच्चन जी को हमने 1973 में साइन किया था। उस वक्त वह जाहिर तौर पर वह अमित जी से बड़ी स्टार थीं। उनकी कास्टिंग पर मुझे कइयों ने क्रिटिसाइज भी किया था कि इतनी बड़ी स्टार को एक छोटे लेंथ वाले रोल में क्यों कास्ट किया। इस पर मैंने जवाब भी दिया कि वह कैरेक्टर बहुत स्ट्रॉन्ग था। उसे जया बच्चन जैसी प्रोफेशनल एक्ट्रेस ही निभा सकती थीं।

जया जी की आंखों में एक अलग किस्म का मैजिक है। आप उसकी झलक उनकी हर फिल्म में देख सकती हैं। शोले में एक सीन है, जहां उनका किरदार फ्लैशबैक में जाता है। तांगे के पीछे भाग रहा होता है। वहां पर उनकी चंचलता को आप देखिए और तुरंत जब वह किरदार कट टू अपने वर्तमान में आता है, जहां वह विधवा है तो उनके आंखों का सूनेपन को देखे तो समझ में आता है कि वह कितनी बड़े रेंज की कलाकार हैं।

सबसे बड़ी बात यह थी कि वह इतनी बड़ी स्टार होने के बाद भी उनमें टेंट्रम नहीं था। फिल्म में एक सीन है, जहां उनका किरदार बार-बार लालटेन जलाता है, उसकी शूट में काफी वक्त जाता था। दोपहर 2:00 बजे के बाद से ही लाइटिंग वगैरह शुरू हो जाती थी। 5:00 से 6:00 बजे जैसे ही सूर्यास्त की दहलीज पर माहौल होता था उसी वक्त हमें वह कैमरे में कैप्चर कर लेना होता था और उसके लिए हमें एक टेक से ज्यादा काम नहीं करना होता था। और यकीन मानिए कि वह सीक्वेंस हमने पूरे फिल्म की शूटिंग के दौरान 50 बार की है, लेकिन कभी जया जी को कभी परेशान नहीं देखा। उस फिल्म की शूटिंग हम लोगों ने 3 अक्टूबर 1973 में शुरू की थी। उस वक्त जया जी प्रेग्नेंट थीं। फिर जब बाद में उन्होंने श्वेता बच्चन को जन्म दिया तो डिलीवरी के 3 महीने बाद ही वह फिल्म की शूटिंग को रिज्यूम कर गई। रिज्यूम जब उन्होंने किया तो कैमरे पर हम लोगों को महसूस हुआ कि वह थोड़ी सी चबी लग रही है। हमने उन्हें कहा तो उन्होंने तुरंत लीन करने का फैसला किया और वह लीन होकर आई और शूटिंग की। यह लेवल था उनके कमिटमेंट का।'

जया के दोस्त और एक्टर अनिल धवन बोले-'जया का कद छोटा है पर पंगा नहीं ले सकता'

'जया को मैं करीब 50 साल से जानता हूं। हम दोनों ने पुणे में फिल्म इंस्टीट्यूट से साथ ही एक्टिंग की पढ़ाई की है। उसके बाद हम दोनों मुंबई गए। मैंने उनके साथ में ‘पिया का घर’ और ‘अन्नदाता’ जैसी एक-दो फिल्में की हैं। ‘पिया का घर’ उस वक्त बड़ी हिट हुई थी। फिल्म साइन करते वक्त मुझे पता चला कि जया ने भी इस फिल्म को साइन किया है। मुझे बेहद खुशी हुई। कॉलेज के दिनों से ही जया अच्छी अदाकारा थी। उन्होंने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर सत्यजीत रे की एक फिल्म में भी काम किया था। जया कद में भले ही छोटी हों पर वो इतनी बेबाक हैं कि आप उनसे ‘पंगा’ नहीं ले सकते। वो हमेशा निडर रही हैं। मुझे याद है एक बार प्रिंसिपल के ऑफिस में जाकर हमें कुछ बोलना था और हम सब क्लास में ही सोचते रहे कि कौन जाएगा तभी जया ने कहा वो जाएंगी। प्रिंसिपल के ऑफिस पहुंचे ही हम सब जहां चुप होकर खड़े हो गए, वहीं जया ने निडर होकर प्रिंसिपल को बातें सुना दीं। वो हमेशा से ही दबंग हैं। गलत के खिलाफ चुप नहीं बैठतीं।'


बच्चन परिवार के मेकअप मैन और निर्माता दीपक सावंत बोले- 'जया जी को गिफ्ट दिया तो भड़क गईं'

‘'सभी जानते हैं कि जया जी का स्वभाव बिंदास है। उन्हें जो बोलना है वह बोल देती हैं। जब मैंने दूसरी फिल्म ‘गंगा देवी’ बनाई तब भी अमित जी और जया जी को लिया था। दोनों ही मेरी फिल्म में काम करने के लिए पैसे नहीं लेते हैं, लेकिन मुझे ऐसा लगा इन्हें कोई गिफ्ट देनी चाहिए। तब मैंने गुची की एक अच्छी सी हैंड बैग ली। जब उन्हें प्रजेंट किया तो वे जया जी बहुत गुस्सा हुईं। कहने लगी कि तुम्हें इतना खर्च करने की क्या जरूरत थी? फिर अमित जी ने उन्हें समझाया कि उनको अच्छा लगा इसलिए उन्होंने गिफ्ट किया। आपने भी तो उनकी फिल्म में काम किया है ना। शायद मैंने जब यह गिफ्ट दिया तब उनका बर्थडे ही था।'

गिफ्ट में मिली साड़ियां सूट नहीं करती थीं, तो फिल्मों में पहनीं....

अमिताभ मुझे गिफ्ट में अक्सर महंगी हैवी कांजीवरम साड़ियां देते थे। मजे की बात यह थी, उनमें से ज्यादातर साड़ी व्हाइट के साथ पर्पल कलर की बॉर्डर वाली होती थीं, जो मुझ पर बिल्कुल सूट नहीं करती थीं। फिर भी मैं उन साड़ियों को पहन लिया करती थी, जिससे अमितजी को बुरा न लगे। मैंने फिल्म अभिमान के गाने ‘तेरी बिंदिया रे’ में भी ऐसी ही एक साड़ी पहनी है।(जैसा कि जया ने अमिताभ की बायोग्राफी ‘टू बी ऑर टू नॉट बी : अमिताभ बच्चन’ के लेखक मोहम्मद खालिद को बताया था)

मील के पत्थर


1963 में 15 साल की उम्र में किया था सत्यजीत रे की बंगाली फिल्म ‘महानगर’ में अभिनय।
1988 में रिलीज अमिताभ अभिनीत फिल्म 'शहंशाह' जया के आइडिए पर इंदर राज ने लिखी थी।
1992 में पद्मश्री अवॉर्ड मिला। उन्हें 9 फिल्म फेयर और 3 आईफा अवॉर्ड भी मिले।
1998 लगभग 24 साल बाद गोविंद निहलानी की फिल्म ‘हजार चौरासी की मां’ से फिर एक्टिंग की शुरुआत की थी।
2004 में समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद बनीं और अब भी वे इसी पार्टी से जुड़ी हुई हैं।



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जया बच्चन 2004 में समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद बनीं और अब भी वे इसी पार्टी से जुड़ी हुई हैं।


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