'खिचड़ी' फेम अनंग देसाई बोले- जब कॉलेज में था तो केक की जगह लड्डू खाकर मनाता था जन्मदिन
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी)से एक्टिंग का कोर्स खत्म करके प्रोफेशनल लाइफ शुरू करने वाले अनंग देसाई 67 साल के हो गए हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में अनंग ने अपनी एक्टिंग जर्नी पर खुलकर बात की। साथ ही बताया कि जब वे एनएसडी थे, तब अपना बर्थडे केक की जगह लड्डू खाकर मनाते थे। अनंग की पहली फिल्म 'गांधी' 1982 में आई थी।वहीं, उनका सीरियल 'आज से स्वराज' था। उनका सीरियल 'खिचड़ी' काफी पॉपुलर हुआ है।
अपनी जर्नी के बारे में अनंग ने जो कहा, पढ़िए उन्हीं की जुबानी
भगवान का शुक्र है कि अब तक का सफर बहुत सुखद रहा है। 1982 में 'गांधी' फिल्म आई, जिसमें मैंने जे. बी कृपलानी का रोल प्ले किया था। इसके बाद दिल्ली से ही 'आज से स्वराज' सीरियल किया। उसके बाद मुंबई आ गया। जिन फिल्मों में काम करने में मजा आया, उनमें 'हमारा दिल आपके पास है', 'यादें' और 'जुर्म' शामिल हैं।
अमरीश पुरी के साथ 'गांधी' फिल्म की थी। वे बहुत बड़े कलाकार थे। लेकिन जब भी मिलते थे, तब बड़े गर्मजोशी के साथ मिलते और प्यार से बातें करते थे। 'गांधी' के बाद जब भी किसी अन्य फिल्म में हमारी कास्टिंग हो जाती थी, तब बोलते थे अरे इधर भी आ गए।
'कहो ना प्यार है' के बाद ऋतिक रोशन का बड़ा क्रेज था। उसके बाद 'यादें' की शूटिंग शुरू हुई थी। एक बार जब इस फिल्म की शूटिंग उदयपुर में करके हम मुंबई लौट रहे थे, तब मेरी पत्नी ने कहा कि अगर ऋतिक के साथ एक ही फ्लाइट में आ रहे हो तो एयरपोर्ट पर बच्चे उनसे मिलना चाह रहे हैं।मैंने ऋतिक से रिक्वेस्ट की कि एयरपोर्ट के बाहर दो मिनट के लिए रुक जाएंगे तो बच्चे आपसे मिल लेंगे। ऋतिक ने बात मान ली और वे बच्चों से बड़े अच्छे से मिले। बातें की और फोटो भी खिंचवाईं।
मेरा संघर्ष ऐसा नहीं रहा कि रोड पर सोया हूं। निर्माता-निर्देशक से मिलने का एक संघर्ष जरूर रहा है। प्रोड्यूसर- डायरेक्टर कभी मिलते तो कभी नहीं मिलते। मिलने पर उन्हें बताना पड़ता था कि मैं एक एक्टर हूं और काम करना चाहता हूं।
मुंबई आया तो श्याम बेनेगल 'भारत एक खोज' बना रहे थे। उन्होंने दिल्ली में मेरा एक प्ले देखा था। इसलिए जब मैं बेनेगल से 'भारत एक खोज' में काम मांगने गया तो मुझे ज्यादा परेशानी नहीं हुई। क्योंकि वे मेरे परफॉर्मेंस से वाकिफ थे। उनके साथ जुड़ने के बाद 'भारत एक खोज' में अलग-अलग रोल प्ले किए।
यही वह समय था, जब महेश भट्ट से मिलने गया। उन्होंने कहा वक्त मिलेगा तो जरूर बुलाता हूं। उन्होंने काफी समय बाद मुझे फिल्म 'जुर्म' के लिए बुलाया। जिसमें विनोद खन्ना, संगीता बिजलानी जैसे एक्टर्स थे। उसके बाद उनके साथ ऐसा एसोसिएशन हुआ कि 'गुनाह', 'गुमराह', 'आशिकी' जैसी फिल्मों के साथ-साथ वहीदा रहमान के साथ एक टेली फिल्म में भी मुझे कास्ट किया गया। एक अच्छा सिलसिला चल निकला। सतीश कौशिक, अनुपम खेर के साथ में काफी काम किया, जो राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से मेरे अच्छे दोस्त हैं।
'खिचड़ी' सीरियल में मेरा बाबू जी का रोल लोगों को बहुत पसंद आया। यह मेरे करियर का लैंड मार्क भी रहा। इस पर फिल्म भी बनी, जो बहुत लोकप्रिय हुई। मेरे रोल को बहुत सराहा गया और अवॉर्ड भी मिले। कॉमेडी प्रोग्राम में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन 'खिचड़ी' के सेट पर हम सभी एक टीम की तरह हो गए थे। साथ में भोजन करते थे और खूब हंसी मजाक भी करते। कई बार रिहर्सल और टेक देने के दौरान हम सबकी हंसी छूट जाती थी, क्योंकि आतिश कपड़िया ने इस शो को लिखा ही ऐसा था। फिर दोबारा टेक देने पड़ते थे।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी मैं अभिनय कर रहा हूं। इसमें नेटफ्लिक्स के लिए एक वेब फिल्म है और दूसरी अमेजॉन प्राइम के लिए है। इनकी आधी शूटिंग कंप्लीट हो गई है। दोनों में अच्छे किरदार कर रहा हूं।ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अच्छे रोल और अच्छी स्क्रिप्ट पर ही काम करूंगा।
मैं उन वेब सीरीज को करने में सहमत नहीं हूं, जिनमें बोल्ड सीन होते हैं। ऐसा करना भी नहीं चाहूंगा। परफॉर्मेंस और कैरेक्टर बेस रोल ही करता हूं। वेब सीरीज में भी अच्छी-अच्छी कहानियां आ रही हैं। ऐसा नहीं है कि अश्लीलता ही दिखाई जाए।
मेरी भी कोशिश होती है कि पिछली बार से अच्छा करूं और उत्सुकता बनी रहे तभी कलाकार जिंदा रहता है। अगर तृप्त हो गए, तब आगे कैसे बढ़ेंगे। हां, खुश किस्मत रहा हूं कि कि मुझे लगातार काम मिलता रहा है। जर्नी से खुश हूं, यही अच्छी बात है।
बर्थडे खुशी का दिन होता है और परिवार के साथ खुश रहते हैं। जब छोटे थे, तब दोस्तों को बुलाकर बर्थडे पार्टी सेलिब्रेट करते थे। बच्चों के साथ खाना-पीना हो जाता था और गेम्स खेलते थे। बड़े हुए और कॉलेज में आए तो फ्रेंड्स को बाहर खिलाने ले जाते थे। शादी के बाद सिर्फ पत्नी के साथ बर्थडे पार्टी पर कहीं बाहर खाना खाने जाता था।
अब बच्चे और दोस्त हो गए हैं, तो घर पर लोगों को बुलाते हैं। इस बार लॉकडाउन है तो सिर्फ परिवार के साथ घर पर हूं। हां, केक जरूर काटूंगा।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के समय जब हम सब हॉस्टल में थे, तब केक नहीं मिलता था। तब बेसन के लड्डू को केक बनाकर खाते और हॉस्टल के कमरे में सेलिब्रेट करते थे। फिर शाम को अनुपम खेर, सतीश कौशिक, गोविंद नामदेव समेत चार-पांच लोगों के साथ बाहर खाना खाने जाते थे।
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