नीना गुप्ता बोलीं- 'मेरे वाला' की आदत भूल जाओ, शैम्पू और हैंडवॉश में पानी डालकर चला रहीं हूं काम
एक्ट्रेस नीना गुप्ता इन दिनों उत्तराखंड के मुक्तेश्वर में रह रही हैं। जहां से हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो शेयर करते हुए लोगों से 'मेरे वाला' कहने की आदत को भूलने के लिए कहा। खुद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यहां सामान की बेहद कमी है और मैं शैम्पू से लेकर हैंड वॉश तक में पानी डालकर इस्तेमाल कर रही हूं। ताकि वो ज्यादा दिनों तक चल सके।
वीडियो में नीना ने बताया कि हम यहां मुक्तेश्वर में 5-6 दिनों के लिए आए थे, लेकिन अब तो दो महीने हो रहे हैं और चीजें खत्म हो रही हैं। ऐसे में हम जो चीज उपलब्ध है उसी से काम चला रहे हैं, और जो खत्म होने वाली है, उसे बचत करके उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब हम बचत करते हुए एक सीमा में रहकर जीना सीख गए हैं। ये एक नया अनुभव है और इसमें मुझे कोई मुश्किल भी नहीं हो रही।
मेरे वाला कहने की आदत छोड़ दो
वीडियो में नीना कहती हैं, 'मेरे वाला भूल जाओ। मेरे वाला शैम्पू, मेरे वाला हैंड वॉश, मेरी वाली क्रीम, मेरी वाली चाय की पत्ती, मेरे वाला मॉइश्चराइजर भूल जाओ। मैं जहां हूं ना मुक्तेश्वर में, यहां सबकुछ मिलता है, लेकिन वो मेरा वाला नहीं मिलता ना जो बॉम्बे में मुझे आदत थी। तो मैं सिर्फ 5-6 दिन के लिए आई थी यहां, अब तो दो महीने हो रहे हैं, तो चीजें खत्म हो रही हैं।
शैम्पू में पानी डालकर चलाया काम
आगे उन्होंने बताया 'उस दिन शैम्पू खत्म हो रहा था तो मैंने उसमें पानी डाल दिया और पानी डालने के बाद तीन बार मेरे बाल धुल चुके हैं। ऐसे ही वो जो मेरा हैंडवॉश था, वो भी खत्म हो रहा था तो मैंने उसमें भी पानी डाल दिया। छह दिन हो गए हैं, वो भी चल रहा है। टूथपेस्ट तो कोई भी इस्तेमाल कर सकते हैं। क्रीम एक दिन छोड़कर लगा रही हूं, ताकि वो लंबा चले क्योंकि मेरा वाला यहां नहीं मिलता।'
गैस बचाना भी सीख लिया
नीना गैस बचाना भी सीख गई हैं। उन्होंने कहा, 'मेरे वर्कर को अंडा और चुकंदर उबालने थे, तो मैंने गैस बचाने के लिए दोनों को साथ में उबाल दिया। क्योंकि यहां सिलेंडर की समस्या है और वो आसानी से नहीं मिलता है। इसलिए मैंने गैस की बचत की।
नया अनुभव है, जीवन बदल रहा है
वे बोलीं, 'तो बचत कर करके एक सीमा में रहकर जीना अब हम सीख चुके हैं, ऐसी कोई मुश्किल बात नहीं लग रही है, कोई मुश्किल नहीं हो रही है। एक नई आदत सी पड़ रही है। ठीक है, चाय की पत्ती नहीं है तो जो सामान्य पत्ती उबालकर पीते हैं, उसी को पी लेती हूं। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। ये एक नया अनुभव है, जीवन बदल गया है, अच्छे के लिए बदल रहा है, हालांकि जिसकी वजह से बदल रहा है वो कारण बहुत बुरा है। लेकिन मेरा वाला भूल जाओ।'
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