सचिन जोशी की कंपनी के कर्मचारियों का आरोप- कई महीनों से नहीं दी सैलरी, अब लॉकडाउन की आड़ ले रहे

प्रोड्यूसर सचिन जे. जोशी की कंपनी वाइकिंग वेंचर्स के कमर्चारियों ने उनपर वेतन न देने का आरोप लगाया था। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कंपनी ने कई महीनों से सैलरी नहीं दी है। इस बारे में पूछे जाने पर हमें भरोसा बनाए रखने के लिए कहा जाता है। आरोप लगाने वालों की मानें तो सैलरी में अनियमितता पिछले एक साल से जारी है। कंपनी अब लॉकडाउन के कारण फंड न होने का बहाना बना रही है।
सैलरी न मिलने से कंपनी छोड़ चुके 30 लोग
सचिन की कंपनी का पीआर देख चुकीं तस्कीन नायक ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, "तकरीबन 30 लोग वाइकिंग वेंचर्स छोड़ चुके हैं। इसकी वजह सैलरी न मिलना है। पिछले एक साल में कुछ ही महीनों की सैलरी अकाउंट में क्रेडिट हुई है। दो महीने की सैलरी तो मुझे भी नहीं मिली है। बाकी 30 लोगों की 4-4 महीने की सैलरी बची हुई है। हमारे मेहनताने के तकरीबन 31 लाख रुपए बचे हैं, जिसका भुगतान कंपनी करना नहीं चाहती।"
लॉकडाउन की आड़ में बकाया नहीं देना चाहते
तस्कीन ने आगे कहा, "अब कंपनी और सचिन जोशी लॉकडाउन की आड़ ले रहे हैं, ताकि बकाया पेमेंट न देना पड़े। वे यह आरोप भी लगा रहे हैं कि हम लोग उनके एक्स सीईओ से जुड़ गए हैं। जबकि यह सरासर झूठ है। उनके पास हमारे आरोपों के जवाब भी नहीं हैं। सालभर से यह सिलसिला चल रहा है और अब लॉकडाउन की आड़ में वे अपनी करतूतों को छुपा रहे हैं।"

तस्कीन के मुताबिक, 26 मार्च को कंपनी ने मेल भेजा था कि 19 अप्रैल से मई के पहले सप्ताह के बीच बकाया रकम का भुगतान कर दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने संकट की इस घड़ी में सहयोग देने की अपील भी की थी। लेकिन बकाया राशि का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है।

सचिन की सफाई, बोले- यह मुझे बदनाम करने की कोशिश
पूरे मामले पर सचिन का स्पष्टीकरण भी सामने आया है। उनके मुताबिक, यह सब उन्हें बदनाम करने की कोशिश है। जिसे वे कभी कामयाब नहीं होने देंगे। बकौल सचिन, "हर कंपनी में नाखुश रहनेवाले कर्मचारी होते हैं। हमारे मामले में मुट्ठीभर लोग मीडिया का इस्तेमाल कर हमारी छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।"
सचिन का दावा- मामला पुरानी कंपनी से जुड़ा
सचिन का दावा है कि यह मामला उस विदेशी कंपनी से जुड़ा हुआ है, जिसे उन्होंने अधिग्रहित किया था। वाइकिंग वेंचर्स ने तुगबोट नामक कंपनी अधिग्रहित की थी, बाद में जिसका नाम बदलकर थिंकटैंक कर दिया था। वे कहते हैं, "थिंकटैंक का विवाद इस वक्त लेबर कोर्ट में है और हमें अपनी न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।" सचिन की मानें तो उन्होंने बदनाम करने वाले सभी कर्मचारियों को लीगल नोटिस भेजा है।
कर्मचारियों पर दो जगह काम करने का आरोप
सचिन कहते हैं, "डील यह थी कि राजस्व के मामले में यह कंपनी (थिंकटैंक) आत्मनिर्भर बनेगी और हम उन्हें पूरा सहयोग और ढांचागत सुविधाएं मुहैया कराएंगे। लेकिन कंपनी धांधलियों और देनदारियों के चक्कर में फंसकर रह गई। कर्मचारियों द्वारा दो-दो जगहों पर काम करने से लेकर पैसों की धांधलियों तक कई तरह की समस्याएं थीं, जो उन्होंने सोशल मीडिया पर भी स्वीकार की हैं। एक बार धांधलियों से जुड़े मसले सुलझ जाएं तो उनकी देनदारियों का मसला भी सुलझ जाएगा।"
सबूत के तौर पर कर्मचारियों की चिट्ठियां हैं पास
सचिन ने आगे कहा, "हमारे पास कर्मचारियों की चिट्ठियां मौजूद हैं, जिनमें एक ही वक्त में दो जगहों पर काम करने को लेकर उनकी स्वीकृतियां दर्ज़ हैं। हम इस बात की जांच कर रहे थे कि उन्होंने मुंबई के एक अखबार को हमारे खिलाफ इस्तेमाल किया है। इसके बाद लॉकडाउन घोषित हो गया। अब मीडिया का इस्तेमाल कर वे हमें फिर से डराने‌ की कोशिश कर रहे हैं। हमें कानूनी लड़ाई लड़ने में कोई दिक्कत नहीं है, मगर मीडिया का इस्तेमाल कर हमारी छवि को नुकसान पहुंचाने की इस कोशिश के खिलाफ भी हम कानूनी कार्रवाई करेंगे।"



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Employees Of Sachiin Joshi's Company Viiking Ventures Claims He Is Not Paying Their Dues


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