8 साल की उम्र से काम कर रहे नट्टू काका को 63 साल की उम्र में मिली पहचान, बोले, "कई बार निराश हुआ लेकिन इसके बावजूद हार नहीं मानी"
महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना के मद्देनजर 65 साल से अधिक उम्र के कलाकारों की शूटिंग पर रोक लगाई थी। सरकार के इस आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस मौके पर दैनिक भास्कर ने सीरियल 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के नट्टू काका का किरदार निभाने वाले सीनियर एक्टर घनशयाम नायक से बात की।
अमिताभ बच्चन तो मुझसे उम्र में बड़े हैं, वो काम कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं?
बहुत खुश हूं क्योंकि आखिरकार सीनियर कलाकार को काम करने का मौका मिल ही गया। मैं ऐसे कई सीनियर एक्टर्स को जानता हूं जिन्हे अपनी आखिरी सांस तक काम करने की इच्छा है। मैं भी उन्ही में से एक हूं। हमें घर में बैठाकर कोई फायदा नहीं हैं। मैं पूरी तरह से फिट हूं और अपने अंतिम क्षण तक काम करना चाहता हूं। हां, यदि तबियत नाजुक हैं तो जाहिर हैं इस माहौल में घर से बाहर निकलना सुरक्षित नहीं हैं। लेकिन तबियत यदि काम करने की इजाजत दे रही हैं तो पूरी सावधानी बरतकर शूट करना गलत काम नहीं हैं। अमिताभ बच्चन तो मुझसे उम्र में बड़े हैं, वो काम कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं?
गाइडलाइन को ध्यान में रखकर मुझे शूट पर नहीं बुलाया जाता था:
मैं पिछले 5 महीने से घर पर बैठा हूं। पहले लॉकडाउन ने काम रोका था और फिर 65 साल के उम्र के ऊपर के आर्टिस्ट का शूट पर ना आने की गाइड लाइन ने। हमारे शो की शूटिंग शुरू हो चुकी थी लेकिन गाइडलाइन को ध्यान में रखकर मुझे शूट पर नहीं बुलाया जाता था। लेकिन अब आखिरकार प्रोड्यूसर असित मोदी ने मुझे कॉल किया और कहा की चंद दिनों में हम आपके साथ शूट करना शुरू कर देंगे। उनकी बातें सुनकर बहुत खुशी हुई। जिस घड़ी का इतने महीनों से इंतजार था, वो अब आ गई। मैंने असित जी से निवेदन किया कि मुझे सेट पर आने से पहले करीब 1 हफ्ते का वक्त दें ताकी अपने आपको तैयार कर सकूं। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया हैं कि वे मुझे अपने घर से सेट तक और फिर सेट से घर तक पहुंचाने का इंतजाम भी करेंगे।
मैं सिर्फ 'तारक' का हिस्सा बनकर संतुष्ट हूं:
पिछले 13 साल से अपने आपको पूरी तरह से इस शो को कमिट किया है। इस दौरान मुझे करन जौहर और संजय लीला भंसाली के प्रोडक्शन हाउस से भी कुछ छोटे रोल्स के लिए ऑफर आए हालांकि मैंने उन्हें करने से इंकार कर दिया। नट्टू काका का रोल बहुत ही लोकप्रिय है और जिस तरह की पॉपुलैरिटी की ख्वाहिश थी वो मुझे इस शो से मिल गई है। अब मैं 76 साल का हो गया हूं, मुझे और कुछ काम करने की जरूरत भी नहीं है। मैं सिर्फ 'तारक' का हिस्सा बनकर संतुष्ट हूं।
जब 2008 में 'तारक मेहता' मिला उसके बाद जिंदगी पूरी तरह से बदल गई:
मैंने 8 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। 63 साल की उम्र में मुझे 'तारक मेहता' शो मिला। इससे पहले बहुत स्ट्रगल किया है। मैंने अपने पड़ोसियों से पैसे लेकर घर चलाया है। कई घंटे काम करता तब जाकर 3 रूपए मिलते थे। लेकिन जब 2008 में 'तारक मेहता' मिला उसके बाद जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। तकरीबन 350 हिंदी फिल्म और कई गुजराती फिल्म करने के बावजूद मुझे वो पहचान नहीं मिली जो 'तारक' से मिली। अब मैं घर बैठकर भी खा सकता हूं। इस लॉकडाउन में मुझे कभी भी पैसों की कमी होने का एहसास नहीं हुआ।
लोगों को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए:
इन दिनों, एक्टर्स बहुत जल्दी हार मान जाते हैं। काम ना मिलने पर जल्दी से डिप्रेस्ड या फ्रस्टेट हो जाते हैं। काम ना मिलने पर वे गलत कदम उठा लेते हैं जोकि बहुत गलत हैं। मेरा उदाहरण देखिए, 8 साल से लेकर 63 साल तक कोई पहचान नहीं मिली। कई बार निराश हुआ लेकिन इसके बावजूद हार नहीं मानी, बस काम करता चला गया। 63 साल की उम्र के बाद मुझे पहचान मिली और पैसा कमा पाया। लोगों को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती।
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