10 दिनों के अंदर गौरव चोपड़ा ने एक साथ खो दिए माता-पिता, बोले- मां कैंसर से जंग जीत गई थीं, पिता को कोविड 19 होने की खबर नहीं सह पाईं
टेलीविजन एक्टर गौरव चौपड़ा की मां का निधन 19 अगस्त को पैनक्रिएटिक कैंसर के चलते हो गया है। पिछले तीन सालों से एक्टर की मां चौथी स्टेज के कैंसर से जंग लड़ रही थीं। एक्टर के लिए मां को खोना किसी सदमे से कम नहीं था, लेकिन इसके 10 दिनों बाद ही उनके पिता भी गुजर गए। उनके पिता कोविड 19 पॉजिटिव पाए गए थे जिनका इलाज मुंबई के एक अस्पताल में जारी था। एक्टर ने बताया है कि पिछले तीन सालों से लगातार उनके पिता मां का ख्याल रख रहे थे और कैसे दोनों ने एक साथ ही दुनिया को अलविदा कहा।
गौरव चौपड़ा के माता-पिता एक दूसरे से बेहद करीब थे। एक्टर ने इस बारे में बात करते हुए मुंबई मिरर से कहा, 'मेरी मां पिछले तीन सालों से स्टेज 4 के पैनक्रिएटिक कैंसर से जूझ रही थीं। डॉक्टर ने उन्हें सिर्फ 4-6 महीनों का समय दिया था लेकिन उस साहसी महिला ने, जो एक स्कूल प्रिंसिपल रही हैं, हर मुश्किलों को हराते हुए गाना गाया, डांस किया, ट्रेवल किया और हर त्यौहार मनाया। कैंसर उन्हें नहीं हरा पाया मगर कोरोना से हार गईं। पहली बार मैंने उस अमर आत्मा को कमजोर पड़ते देखा'।
पिता वैंटिलेटर में थे और मां गुजर गईंः गौरव
गौरव ने आगे बताया कि जब उनकी मां गुजरीं तो पिता वैंटिलेटर पर थे। ऐसे में उन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी। उनकी आखिरी बातचीत भी एक दूसरे के बारे में ही थी। पिछले साढ़े तीन सालों से पिता मां का ख्याल रख रहे थे और साथ में ही चले गए। एक्टर ने कहा, 'मेरी मां कि तबियत में उस दिन तक सुधार था जब तक उन्हें पिता के कोविड 19 से संक्रमित होने की बीत नहीं पता थी। जिस दिन से दोनों ने एक दूसरे से बातचीत बंद की उनकी तबियत दिन पर दिन बिगड़ती चली गई'।
पिता को बताया अपनी जिंदगी का आदर्श व्यक्ति
गौरव ने पिता के गुजर जाने के बाद इंस्टाग्राम पर उनकी चंद तस्वीरें शेयर करते हुए एक इमोशनल नोट लिखा। एक्टर लिखते हैं, 'मेरे हीरो, मेरे आदर्श, मेरी प्रेरणा। क्या मैं कभी उन जैसा बन सकूंगा ? ऐसा सोच भी नहीं सकता। आदर्श पुरुष, आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, एक ऐसा व्यक्ति जो हमेशा परिवार को हर किसी से ऊपर रखता था। एक आदर्श पिता। मुझे इस बात को समझने में 25 साल लग गए कि सभी पिता उनके जैसे नहीं होते। वे बेहद खास थे'।
'मैं उनका बेटा बनकर धन्य हो गया। मैं जब कभी सड़क पर निकलता था तो मुझे उनके बेटे के रूप में पहचाना जाता था। वे एक आदर्श पति के रूप में पिछले चार साल से मेरी मां की सेहत सुधारने में समर्पित रहे। बीमारी का पता चलने से लेकर उन्हें बचाने तक, और फिर उनका साथ देने हम सबको छोड़ गए। मां ने हमें 19 अगस्त को अकेला कर दिया था, और पापा ने 29 अगस्त को। 10 दिन और वे दोनों चले गए। अब एक खालीपन है, जिसे कोई चीज कभी नहीं भर पाएगी'।
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