थ्रिलर प्रेमियों को पसंद आएगी होस्टेजेस 2, डीनो मोरया, दिव्या दत्ता के किरदारों से दिलचस्प बनती चली गई 12 एपिसोड्स की सीरीज
एक दर्जन एपिसोड से लैस ‘होस्टेजेस 2’ को तसल्ली से गढ़ा और शूट किया गया है। इस बार गेंद अपहरण करने वालों के पाले में है। सीएम हांडा (दलीप ताहिल) को किडनैप किए हुए लोग ही इस बार फंसे हुए हैं। फिर भी पृथ्वी सिंह अपनी बीमार पत्नी सबा (श्रीस्वरा) के इलाज को कैसे अंजाम देता है, यह सीजन उसको समर्पित है। इस काम में पीटर (अमित सियाल), सारा (फजेह जलाली), पृथ्वी का टेक सेवी साला (आशिम गुलाटी, तुम बिन2 वाले) उसके मददगार हैं।
मर्डरर के किरदार में जचे डीनो मोरया
एक दर्जन एपिसोडों को यूं ही नहीं बनाया गया है। थोक के भाव में ट्विस्ट और टर्न लाने के लिए किरदारों की फौज खड़ी की गई है। कुछ नए किरदारों की एंट्री हुई है। वो पुलिस और किडनैपरों के बीच मध्यस्थ करने वाली निगोशिएटर आएशा और पुलिस फोर्स में पृथ्वी के विकल्प दत्त हैं। मेकर्स ने कोल्ड ब्लडेड मर्डरर शख्स के तौर पर डीनो मोरया को इंट्रोड्यूस किया है। वो कॉरपोरेट और सीएम हांडा के जरिए कॉरपोरेट और पॉलिटिशन के बीच स्याह और संदेहास्पद गठजोड़ को रिप्रजेंट करते हैं।
इन किरदारों की वजह से बाद में चलकर पता चलता है कि पृथ्वी ने जो सीएम हांडा का अपहरण किया, वह तो छोटी सी चीज थी। उस सब के पीछे एक बड़ी वजह और साजिश मौजूद है। उनका उद्भेदन जिस परतदार तरीके से होता है, वह इस सीजन से लोगों को जोड़े रखता है।
यहां पुलिस और किडनैपरों के बीच जुड़ाव की मूल कड़ी निगोशिएटर आएशा (दिव्या दत्ता) है। उसकी वजह से कहानी दिलचस्प बनती है। बड़ी प्रामाणिकता के साथ यह स्थापित होता है कि कैसे बिना खून खराबे के केसेज सॉल्व किए जा सकते हैं। पृथ्वी, पीटर आदि का आएशा के साथ जो सवाल जवाब से एक दूसरे की मन की बात बाहर निकालने की पूरी कवायद है, वह मजेदार बनी है। शक्ति संतुलन के नाजुक बदलाव को बहुत करीने से स्थापित किया गया है।
सचिन ममता कृष्ण ने निर्देशित किया दूसरा सीजन
पहला सीजन सुधीर मिश्रा ने डायरेक्ट किया था। इस बार कमान सचिन ममता कृष्ण के हाथों में है। कृष्ण ने पुलिस कंट्रोल रूम और पृथ्वी सिंह की दुनिया को बखूबी रचा है। उन्होंने कंट्रोल रूम में जो उन्माद है, उसे स्पष्ट तौर पर पकड़ा है। सधे हुए कलाकारों के चलते किरदार उस दुनिया में रचे बसे भी हैं। एक सार है इस सीजन में कि किसी भी बंधक वाली सिचुएशन को आकस्मिक तौर पर खत्म या हल करने के बजाय बातचीत के प्रयासों की कितनी लंबी मियाद होनी चाहिए।
बहुपरतीय है होस्टेजेस 2
यहां दर्शकों के सब्र का भी इम्तिहान है। कहानी उनसे तसल्ली से बैठ इसे देखने की मांग करती है। नो नॉनसेंस किस्म के थ्रिलर पसंद करने वालों के लिए यह बहुपरतीय पेशकश है।
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