डॉली डल है, किट्टी बोझिल है, बस कन्फ्यूजन से भरी है नेटफ्लिक्स की फिल्म 'डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे'

‘लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का’ की तरह यहां भी अलंकृता श्रीवास्‍तव ने महिलाओं के नजरिए से उनकी अधूरी ख्‍वाहिशों से पर्दा हटाया है। यहां के किरदारों में कन्‍फ्यूजन ज्‍यादा है। जिंदगी से वो क्‍या चाहते हैं, वो इस तेज भागती दौड़ती दुनिया में भी फैसले बहुत आहिस्‍ता लेते हैं।

कैसी है फिल्म की कहानी

डॉली यादव (कोंकोना सेन शर्मा) ग्रेटर नोएडा में अपने परिवार के साथ रहती है। उसकी चचेरी बहन किट्टी (भूमि पेडणेकर) दरभंगा से ग्रेटर नोएडा आती है। बड़े शहर से उसकी उम्‍मीदें हैं। पर महानगरीय जीवन देने से ज्‍यादा बदले में वसूलता भी है। यह किट्टी के साथ भी होता है। प्‍यार में उसे धोखे ही मिलते हैं। हालांकि खुश रहने का जज्‍बा वह कभी कम नहीं होने देती। डॉली खुद में ही कमी मान मृतप्राय शादीशुदा जीवन में जान फूंकने की कोशिश में जुटी है। किट्टी के अनुभवों से वह भी खुद के लिए जीने की कोशिश करती है। डिलीवरी बॉय उस्‍मान अंसारी (अमोल पराशर) में उसे कंधा मिलता है।

अलंकृता जाने अनजाने एक बड़े टॉपिक को सीमित कर गई हैं। हर किरदार के सपने बस परम प्‍यार की तलाश में भटक कर अधूरे ही रह गए हैं। किट्टी टेलीकॉलिंग कंपनी में नौकरी करती है। शारीरिक जरूरतों से महरूम युवाओं को फोन पर रिझाती है। वहीं क्‍लाइंट प्रदीप (विक्रांत मैसी) को दिल भी दे बैठती है। बाद में प्रदीप छत्रसार सिंह निकलता है। डॉली पूरी जिंदगी खुद में खोट महसूस करती रही। उसका पति अमित यादव (आमिर बशीर) बाहर अपनी खुशी ढूंढता रहा। अय्याशियों में डूबा रहता है। प्रदीप ऊर्फ छत्रसार भी शादीशुदा है, मगर डेटिंग ऐप पर जुटा हुआ है। मतलब निकलने पर बदलता है।

फिल्म में कुछ नया नहीं दिखा पाईं डायरेक्टर

फिल्‍म ढेर सारे क्‍लीशे लिए हुए है। पहले प्‍यार में धोखा खाने पर लोग बिखरते ही हैं। छोटे शहरों से लोग बड़े शहर में आते हैं तो बड़े छुई मुई से होते हैं। मैनिपुलेट नहीं कर सकते वो। सर्वाइवल के लिए कॉल सेंटर जैसे सेटअप में ही काम करते रहेंगे। डिलीवरी बॉय बने रहेंगे। प्रॉपर्टी डीलर धोखा ही देगा। दुनिया बेरहम ही मिलेगी। वगैरह वगैरह।

गाने और बैकग्राउंड स्‍कोर अच्‍छे बन पड़े हैं। जॉन जैकब पाया पल्‍ली ने ग्रेटर नोएडा को बखूबी कैप्‍चर किया है। एडीटिंग में कसावट नहीं है। शायद कहानी में ज्‍यादा मोड़ जो नहीं है।

फिल्म में नहीं हुआ किरदारों का सही इस्तेमाल

फिल्‍म पूरी तरह डॉली और किट्टी के इर्द गिर्द है। कोंकोना सेन शर्मा ने उसे पूरी तरह निभाया है। किट्टी के अवतार में भूमि का अनुशासन दिखा है। बाकी आमिर बशीर, विक्रांत मैसी, अनमोल पाराशर, नीलिमा अजीम, कुब्रा सैट, करण कुंद्रा आदि बस खाना पूर्ति करते लगे हैं। ऐसे बेहतरीन कलाकारों से काम लेने में अलंकृता श्रीवास्‍तव विफल रही हैं। वो महिलाओं की शारीरिक जरूरत से टैबू सब्‍जेक्‍ट को डील कर रही होती हैं, पर अपने थॉट, ट्रीटमेंट और लॉजिकों से कन्‍वींस नहीं कर पाई हैं।



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Dolly is dull, Kitty is cumbersome, writing is breathless, just full of confusions Netflix film 'Dolly Kitty and Woh Shining'


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