केबीसी 12 में जाने की बात सुनकर तनवा में आ गए थे पहले कर्मवीर कृष्णावतार शर्मा और राजीव खंडेलवाल, बोले- 'जीती हुई राशि से प्रवासी मजदूरों की मदद करेंगे'

सोनी टीवी के गेम रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति 12 में इस शुक्रवार करमवीर स्पेशल एपिसोड में कृष्णावतार शर्मा और राजीव खंडेलवाल आने वाले हैं। ये कर्मवीर आजीविका ब्यूरो (2005 में स्थापित) नाम की एक स्वयंसेवी संस्था के संस्थापक हैं। यह संस्था राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में प्रवासी मजदूरों के लिए काम करती है। आजीविका ने मजदूरों के पलायन की समस्या हल करने के लिए ऐसा रुख अपनाया है जिससे इन प्रवासियों को संपूर्ण समाधान मुहैया कराया है। इस अवसर पर दैनिक भास्कर ने कृष्णावतार शर्मा और राजीव खंडेलवाल से एक विशेष बातचीत की। आइए जानते हैं क्या कहा उन्होंने:

कौन बनेगा करोड़पति सीजन 12 में आने का अनुभव कैसा रहा?

कृष्णावतार शर्मा : 'मेरे लिए यह एक यादगार अनुभव था। शुरुआत में मैं इस शो में आने और इतने बड़े मंच पर अपनी टीम के कार्यों के बारे में बात करने को लेकर घबराया हुआ था। यह एक अनूठा अनुभव था, जिसमें हमें अपने काम के बारे में बताने का मौका मिला। ऐसे बहुत-से लोग हैं, जिन्हें किसी तरह मदद, छत, खाना और रोजमर्रा की चीजों की जरूरत है'।

'केबीसी में आकर हमें ऐसे प्रवासी मजदूरों को अपना संदेश देने में मदद मिली, ताकि हम उनकी जरूरतों को पूरा करने में हर संभव मदद कर सकें। मैं इस बात को लेकर भी नर्वस था कि हम श्री बच्चन जैसे सुपरस्टार और एक लेजेंड से चर्चा करने वाले हैं। लेकिन जब हम उनसे मिले तो उन्होंने हमें काफी शांत और अपना-सा महसूस कराया। इस दौरान क्रू मेंबर्स ने भी बहुत साथ दिया और उन्होंने हर कदम पर हमारा मार्गदर्शन किया'।

राजीव खंडेलवाल : 'जब हमें पता चला कि हम केबीसी पर आने वाले हैं, तो मुझे बहुत तनाव हो गया था क्योंकि मैं इससे पहले कभी इतने बड़े मंच पर नहीं आया था। जैसे ही हम सेट पर पहुंचे, तो हमें काफी आराम और सुकून मिला। हमारे आसपास का माहौल भी काफी शांत था। जब हम मिस्टर बच्चन से बात कर रहे थे, तो मुझे यकीनन बहुत घबराहट महसूस हो रही थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में मैं बिल्कुल सामान्य हो गया और मेरा मन हल्का हो गया'।

ऐसा लग रहा था जैसे मिस्टर बच्चन हमारे परिवार के सदस्य या कोई रिश्तेदार हों। मैं अमिताभ बच्चन की फिल्में देखते हुए बड़ा हुआ हूं और मैंने उनके कई किरदार देखे हैं। जब आप किसी ऐसे इंसान से व्यक्तिगत तौर पर मिलते हैं तो हमारा सामना बहुत बड़ी सच्चाई से होता है, क्योंकि वो भी बहुत-सी ऐसी चीजों में शामिल होते हैं और उनके मन में भी वही सवाल आते हैं। वो बहुत विनम्र इंसान हैं और उन्हें हमसे सवाल करते देखना और जिस तरह से वो इसे सरल तरीके से पूछते हैं, वो वाकई काबिले तारीफ और प्रेरणादायक है।

प्रवासियों के लिए इस नेक काम को शुरू करने का विचार कैसे आया?

राजीव खंडेलवाल : 'इस सब की शुरुआत 15 साल पहले हुई थी, जब मैंने राजकोट, गुजरात में हमारे जिले का समूह देखा था। मुझे यह देखकर बड़ी हैरानी हुई कि 15-20 लोग एक छोटे-से तंग कमरे में रह रहे हैं। इनमें कुछ लोगों को टीबी था, जिनके पास ना इलाज की सुविधा थी, ना खाना था, ना ही कोई दूसरी आवश्यक चीजें। उनके बच्चों और परिवारों को देखकर मुझे बड़ा झटका लगा, जो कई वर्षों से काम कर रहे थे, लेकिन उनके पास ना पैसा था, ना जिंदगी चलाने के लिए कोई बचत थी। यह पूरी स्थिति विचलित कर देने वाली थी'।

'शुरुआत में कुछ दिनों तक हमने उन लोगों से संपर्क करने की कोशिश की क्योंकि वो हमारे गांव में रहते थे और हम उन्हें जानते थे, लेकिन उनकी स्थिति देखकर हमारी आंखें खुल गईं। हम उनकी इस हालत को लेकर कुछ करना चाहते थे, लेकिन सच तो यह है कि जब हम सब अपनी जिंदगी जीने के लिए काम करते हैं तो ये लोग इतनी खराब हालत में क्यों हैं? मुझे अब भी याद है मेरे दोस्त के साथ मेरी यह चर्चा हुई थी। उस बात को 15 साल हो गए और हम अब भी वही करते हैं जिसकी शुरुआत हमने मदद का हाथ बढ़ाने से की थी। हम जानते हैं कि हम इन बेसहारा परिवारों और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान ला रहे हैं'।

कृष्णावतार शर्मा : 'शुरुआत में यह सब आसान नहीं था। आज हम काफी दूर निकल आए हैं, लेकिन यह सफर बड़ा मुश्किल था और धीरे-धीरे आगे बढ़ा, तब जाकर हमें कुछ मजबूती मिली। जब हमने प्रवासी मजदूरों से मिलना शुरू किया, तो हमें पता चला कि इनकी संख्या बहुत ज्यादा है और काम के लिए वो दूसरे शहरों में जाते हैं। यह देखते हुए हम समझ गए थे कि हमें बड़े पैमाने पर कुछ सोचना होगा। इसमें एक और बड़ी मुश्किल यह थी कि हमें ऐसे संगठनों तक पहुंचना था, जो इसी तरह का काम करते थे और उन्हें इस स्थिति की गंभीरता के बारे में समझाना था, ताकि वो जान सकें कि इन जिंदगियों पर ध्यान देने की जरूरत है। इस तरह हमारे सफर की शुरुआत हुई'।

आपकी जीती हुई राशि से आपके काम में किस तरह मदद मिलेगी?

राजीव खंडेलवाल : 'हमें खुशी है कि हमने केबीसी में एक बड़ी राशि जीती है। यह पैसा उन प्रवासी मजदूरों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जो दुर्घटना के शिकार हुए हैं और जिन्हें चिकित्सा सहायता की जरूरत है। इसके अलावा बहुत-से प्रवासी मजदूर ऐसे हैं, जो भारी कर्ज में दबे हैं और उनके लिए छोटी-मोटी कमाई से अपना गुजारा चलाना और कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हमारा उद्देश्य यही होगा कि हम उन्हें कर्ज मुक्त बनाएं ताकि वो अपनी जिंदगी दोबारा शुरू कर सकें'।



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Karmaveer Krishnavatar Sharma and Rajeev Khandelwal, gets tensed after hearing of going to KBC 12, said - 'will help migrant laborers with the winning amount'


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